Airplane हवा में कैसे उड़ता है,जानिए …

Airplane हवा में कैसे उड़ता है,जानिए …

हवाई जहाज की सवारी करना हम सबको पसंद है. बचपन से जब भी आसमान में प्लेन जाता था, हमारी नजरें उसका पीछा कर प्लेन को दूर तक छोड़ कर आती थीं. फिर उसके धुएं से बनी डिजाइन में आकार ढूंढा करते थे. उस समय शायद हमारे दिमाग में कभी नहीं आया होगा कि इतना भारी विमान सैकड़ों लोगों को लेकर बिना किसी सपोर्ट के उड़ कैसे जाता है. लेकिन बड़े होते-होते सबके दिमाग में यह बात जरूर आई होगी. अगर जवाब नहीं पता, तो हम आपको बताते हैं.

एयरप्लेन कैसे उड़ता है यह समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है. बस फिजिक्स की थोड़ी सी नॉलेज और आप भी बन सकते हैं इसके एक्सपर्ट…

क्या जानते हैं इतना वजन उठाने के बाद भी एयरप्लेन आसानी से कैसे उड़ता है?

इसके लिए हमें चार शब्द याद रखने होंगे-

1. Thrust
2. Drag
3. Weight
4. Lift

सबसे पहले आता है थ्रस्ट. थ्रस्ट उस फोर्स को कहते हैं, जो एयरप्लेन को आगे बढ़ने में मदद करती है. इसके लिए प्लेन के दोनों विंग पर एक-एक इंजन लगा होता है. इस इंजन का काम है थ्रस्ट पैदा करना. यह इंजन सामने सा आ रही हवा को खींच कर कंप्रेस (हवा का दबाव बढ़ाना) करता है और पीछे छोड़ देता है. यह ठीक वैसा ही हुआ जैसे हम गुब्बारे में हवा भर उसे छोड़ दें, तो वह ऊपर की तरफ भागने लगता है. कंप्रेस हवा को छोड़ने से थ्रस्ट पैदा होता है.

आइए समझते हैं कैसे काम करता है यह इंजन-

विंग पर लगे इंजन में 5 महत्वपूर्ण पार्ट्स होते हैं.

1. अगर आप इंजन को सामने से देखेंगे, तो सबसे पहले एक फैन दिखाई देगा. यह पंखा टाइटेनियम का बना होता है और बहुत पावरफुल होता है. इस फैन से लाखों किलो हवा को खींचकर इंजन में भेजा जा सकता है.

दरअसल, हवा दो रास्तों से होकर जाती है. या तो वह सीधा इंजन में जा सकती है या फिर उसके बगल से निकल जाती है. इंजन के बगल से गुजरने वाली हवा को हम Bypass कहते हैं. इस भी थ्रस्ट पैदा होता है और यह इंजन को ठंडा रखने में भी बाइपास एयर मदद करती है.

2. कंप्रेसर का काम है हवा को दबा कर उसकी डेंसिटी बढ़ाना. कंप्रेसर चलाने पर उसके ब्लेड छोटे होत चले जाते हैं और हवा को कंप्रेस कर देते हैं.

3.  कंप्रेसर से होकर हवा कंबस्टर में जाती है, जहां उसके तेल  के साथ मिलाकर जलाया जाता है. यह सुनने में शायद आसान लग रहा होगा, लेकिन प्रोसेस बहुत ही कॉम्प्लीकेटेड है.

4.गरम हवा को अब टरबाइन से गुजरती है तो टरबाइन की रफ्तार तेज हो जाती है. इस टरबाइन से ही फैन और कंप्रेसर भी जुड़े होते हैं, जो और तेजी से हवा खींचने लगते हैं.

5.  इस आखिरी स्टेप में कंप्रेस्ड हवा को तेजी से बाहर निकाल दिया जाता है.समझने वाली बात यहां आती है. जैसे ही हवा नोजल से बाहर निकलती है, न्यूटन का तीसरा लॉ लागू हो जाता है.

time pass

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