कोल्ड ड्रिंक्स की बॉटल का आकर ऐसा क्यों होता है ?..

कोल्ड ड्रिंक्स की बॉटल का आकर ऐसा क्यों होता है ?..

आपने कोल्ड ड्रिंक और सोडा तो कई बार पिया होगा, लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि इनकी बॉटल का शेप पानी की बॉटल से काफी अलग होता है. आपने कई बार कोल्ड ड्रिंक खरीदी होगी, लेकिन शायद ही इस बात पर ध्यान दिया हो कि सभी कोल्ड ड्रिंक की बोतलें नीचे से एक जैसी ही होती हैं. इनमें पानी की बॉटल्स की तरह फ्लैट बॉटम नहीं होता है. पानी की बोतल का शेप नीचे से कोल्ड ड्रिंक और सोडे की बोतल के शेप से काफी अलग होता है. ऐसे में आज हम आपको इस आर्टिकल में इसके पीछे की वजह बताने जा रहे हैं, तो आइये जानते हैं..

क्यों अलग होता है बॉटल का शेप?

दरअसल, पानी की बोतल का निचला हिस्सा इसलिए सपाट होता है क्योंकि पानी एक तरल पदार्थ होता है, जिसमें किसी भी तरह का कोई कैमिकल रिएक्शन नहीं होता है. ना ही इसमें किसी तरह की कोई गैस होती है. इसलिए बोतलों के फटने का भी कोई डर नहीं होता है. वहीं कोल्ड ड्रिंक और सोडा बनाने में केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है. जो ड्रिंक्स इन बोतलों में भरी जाती है उनका कार्बोनेशन भी किया जाता है और अगर इसका निचला हिस्सा सपाट होगा, तो बोतल में भरी ड्रिंक आपस में बार-बार मिलेगी, जिससे उनमें गैस बनेगी. इसके साथ ही बोतल के फटने का भी डर रहेगा.

ऐसी बॉटल्स को क्या कहते हैं ?

आपने गौर किया होगा कि कोल्ड ड्रिंक और सोडे की बोतल का निचला हिस्सा उभरा हुआ या पॉइंटेड होता है. यानी ये बोतलें एकदम सीधी नहीं होती हैं. इसका बॉटम फ्लैट नहीं होता है. इसका कारण यह है की इन बोतलों में जो सॉफ्ट ड्रिंक्स भरी जाती है, उनमें फिज़ होती है और जब इन सॉफ्ट ड्रिंक को ठंडा किया जाता है, तो उसके वॉल्यूम में बदलाव होता रहता है. बोतल के नीचे से पॉइंटेड होने के कारण ड्रिंक एडजस्ट होती रहती है और गैस के प्रेशर को भी आसानी से कंट्रोल कर पाती है. ऐसे में इन बॉट्लस को कहीं लाना या ले जाना भी आसान रहता है. इस तरह की खास बोतलों को कॉरगेशन  कहा जाता है.

आपने ये भी देखा होगा कि बोतल का निचला हिस्सा ऊपर वाले हिस्से के मुकाबले काफी टाइट और हार्ड होता है. कई बार बोतल को क्रश करने पर ऊपर वाला हिस्सा आसानी से घूम जाता है, लेकिन नीचे वाले हिस्से को तोड़ने-मरोड़ने में काफी समस्या आती है. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि ड्रिंक की वजह से अंदर बनने वाली गैस का बोतल पर कोई असर न हो. इसी कारण से सॉफ्ट ड्रिंक की बोतल के निचले हिस्से को 3-5 मज़बूत पॉइंट या बंप के साथ डिजाइन किया जाता है. वहीं पानी की बोतल में किसी तरह की गैस न होने के कारण उसके निचले हिस्से को समतल और सपाट रखा जाता है.

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नोट – प्रत्येक फोटो प्रतीकात्मक है (फोटो स्रोत: गूगल)

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