DMart सस्ता सामान बेचने के बावज़ूद अरबों का प्रॉफिट कैसे कमाता है ? जानिए DMart की सफलता की पूरी कहानी…

DMart सस्ता सामान बेचने के बावज़ूद अरबों का प्रॉफिट कैसे कमाता है ? जानिए DMart की सफलता की पूरी कहानी…

भारत में एक रिटेल स्टोर की चेन है जिसका नाम है डीमार्ट. ये काफी सस्ते में अच्छा सामान देते हैं जो और रिटेल स्टोर वाले नहीं दे पाते. अब लोग ये सोचते हैं की ये इतना सस्ता सामान देकर, इतने सारे Discount देकर आखिर कैसे मुनाफा कमा लेते हैं? डीमार्ट के सफल होने का कारण क्या है? डी मार्ट कैसे काम करता है?  ऐसे कई सवाल लोगों के मन में उठते हैं.

डी मार्ट क्या है और किसका है?

डी मार्ट एक सुपरमार्केट चेन  है जिसमें लोगों की रोज़मर्रा की जरूरतों का सामान मिलता है. इसका संचालन Avenue Super marts ltd द्वारा किया जाता है. इसका हेड ऑफिस मुंबई में है और डीमार्ट आज की तारीख में सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाला Supermarket है. हालांकि ये पूरे भारत में नहीं है लेकिन जहां-जहां पर भी इसके Store हैं वहाँ ये खूब मुनाफा कमा रहा है. इसके देशभर में कुल 190 स्टोर हैं. डी मार्ट भारत का ही Supermarket है और इसके संस्थापक राधाकिशन दमानी हैं. इसका पहला स्टोर 15 मई 2002 में पवई, महाराष्ट्र में शुरू हुआ था.

डी मार्ट इतना सफल कैसे?

डी मार्ट की सफलता का पूरा श्रेय इनके संस्थापक राधाकिशन दमानी को जाता है जिन्होंने इस तरह की सुपरमार्केट चेन बनाई जो लोगों के लिए भी फायदेमंद है और उनके खुद के लिए भी फायदेमंद है. राधकिशन दमानी खुद एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं ऐसे में वे आम आदमी की जरूरत को जानते हैं. इसके अलावा वे शेयर बाजार के भी एक्सपर्ट है जिस कारण से उन्हें ये बहुत अच्छी तरह पता है की किस जगह पर किस तरह निवेश करना है ताकि वो फायदेमंद रहे.

डी मार्ट की सफलता के कारण

कोई भी Retail Store अच्छी जगह खोलने के लिए आपको जमीन की जरूरत होती है. अब जमीन या तो खुद की हो या किराए पर ली जाए. अगर आप जमीन को किराए पर लेते हैं तो आपको जीवनभर उसका किराया चुकाना पड़ता है जिससे आप पर अतिरिक्त भार हर महीने पड़ता है. इस भार को आप अपने Business के जरिये ही निकाल पाते हैं. D mart इस किराए के झंझट से काफी दूर रहता है. डी मार्ट कोई भी स्टोर खोलने के लिए अपनी खुद की जमीन खरीदता है ताकि उसे आगे चलकर जमीन के किराए का भार न रहे. अगर डी मार्ट उस जगह पर जमीन नहीं भी खरीद पाता है तो वो कुछ सालों के लिए लीज पर ले लेता है जिससे उसे एक बार पैसा इन्वेस्ट  करके कई सालों तक पैसे नहीं देना पड़ते हैं. अब जब डी मार्ट ने जमीन के किराए का पैसा बचा लिया तो सामान तो सस्ता मिलेगा ही. कई सुपरमार्केट किराए की जमीन का पैसा आपके द्वारा खरीदे गए सामान से ही वसूलते हैं जिसके कारण उनकी कीमत काफी बढ़ जाती है.

धीमी गति से स्टोर खोलना

कई Supermarket की चेन को आपने देखा होगा की एक साथ हजारों सुपरमार्केट कई शहरों में खोल लिए. डी मार्ट ऐसा बिलकुल भी नहीं करता है. डी मार्ट ने साल 2002 से अब तक 190 Store ही खोलें है. इन्हें खोला भी डी मार्ट ने इन्हीं स्टोरों से मुनाफा  कमा कर. यानि D Mart पहले इतना मुनाफा कमाता है की कोई नया स्टोर खोल पाये तब जाकर वो सोच-समझकर एक अच्छी जगह पर अपना स्टोर खोलता है. डी मार्ट को धीमी चाल से चलना पसंद है और इसी धीमी चाल के बलबूते पर आज डी मार्ट सफल है.

डिस्काउंट का खेल

अगर आप डी मार्ट गए हैं तो आपको पता होगा की डी मार्ट में हमेशा आपको Discount मिलता है. इसके अलावा अगर आप किसी और सुपरमार्केट में जाते हैं तो उसी Product पर आपको उतना डिस्काउंट नहीं मिल पाता होगा. डी मार्ट अपने ग्राहकों को अपने से जोड़ने के लिए कभी-कभी नहीं बल्कि डेली डिस्काउंट देता है. इस डिस्काउंट के कारण लोग डी मार्ट आना और Shopping करना पसंद करते हैं.

डी मार्ट को डिस्काउंट कैसे मिलता है?

डी मार्ट में आप जब गए होंगे तब आपको डिस्काउंट मिलता होगा लेकिन आप सोचिए डी मार्ट को इतना डिस्काउंट कैसे मिल जाता है की वो आपको रोजाना डिस्काउंट दे पाते हैं. और जब डी मार्ट इतना डिस्काउंट दे देता है तो उसकी कमाई कैसे होती होगी. डी मार्ट की कमाई के लिए तीन रास्ते हैं.

1) डी मार्ट में आप जो भी प्रॉडक्ट देखते है उन्हें वहाँ रखने के लिए उन प्रॉडक्ट की कंपनी फीस देती है ताकि वो प्रॉडक्ट वहाँ पर बिक सके. अब डी मार्ट में अच्छी मात्रा में जल्दी प्रॉडक्ट बिक जाते हैं इसलिए कंपनी भी फीस देने से हिचकिचाती नहीं.

2) कोई भी दुकान हो या Retail Supermarket हो वो MRP से कम पर ही उस सामान को खरीदते हैं. तो उन्हें उस सामान को लेते वक़्त कंपनियाँ कई तरह के डिस्काउंट देती है जिसके कारण उन्हें MRP से काफी कम रेट पर वो सामान मिल जाता है.

3) डी मार्ट पर सामान काफी तेजी से और ज्यादा मात्र में बिकता है. इसलिए डी मार्ट कंपनियों को कम समय में पैसा दे पाता है. कई कंपनियाँ डी मार्ट की इस रणनीति को देखते हुए उन्हें और भी डिस्काउंट देती है ताकि डी मार्ट उनके प्रॉडक्ट को और ज्यादा तवज्जो दे.

फालतू खर्चे कम

डी मार्ट कभी भी अपने शोरूम में फालतू खर्चे नहीं करता है. डी मार्ट का सीधा सा कान्सैप्ट है कम खर्च में ज्यादा मुनाफा. इसलिए डी मार्ट अपने रिटेल स्टोर पर सजावट, लाइट, स्टाफ आदि पर ज्यादा पैसा खर्च नहीं करता जिससे डी मार्ट की काफी ज्यादा बचत हो जाती है.

प्रॉडक्ट पर फोकस करना

डी मार्ट अगर कोई भी स्टोर खोलता है तो पहले उस एरिया पर अच्छे से रिसर्च करता है. लोगों की जरूरतों को जानता है. ये पता करने की कोशिश करता है की यहाँ पर लोग कौनसे Local Brand को पसंद करते हैं तथा कौन से बड़े ब्रांड को पसंद करते हैं. इसके बाद डी मार्ट अपने स्टोर में लोकल ब्रांड और दूसरे ब्रांड के सामान को रखता है. मान लीजिये की डी मार्ट किसी गुजरात शहर में खुला है जहां पर लोगों को किसी लोकल ब्रांड का पापड़ खूब पसंद है तो डी मार्ट उसे अपने गुजरात के उस स्टोर में जरूर रखेगा. इस तरह लोग किसी बड़े नामचीन सुपरमार्केट जाने की जगह डी मार्ट जाना पसंद करते हैं क्योंकि उन्हें वहाँ उनका पसंदीदा ब्रांड मिल जाता है.

डी मार्ट अब अपने बिजनेस को ऐसा बना चुका है की उसे डिस्काउंट देने में कोई नुकसान नहीं होता है. प्रॉडक्ट की कंपनियाँ भी खुश होकर डी मार्ट को डिस्काउंट देती हैं. उन्हें पता है की डी मार्ट में उनके प्रॉडक्ट की खपत अच्छे से और ज्यादा होगी इसके साथ ही उन्हें पैसे दूसरों के मुक़ाबले जल्दी मिल जाएंगे. बस यही है डी मार्ट का बिजनेस मॉडल और उनके सफल होने की कहानी.

देखे विडियो:

नोट – प्रत्येक फोटो प्रतीकात्मक है (फोटो स्रोत: गूगल)

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. timepass अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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