कलकत्ता के हावड़ा ब्रिज मे एक भी Pillar या Nut-Bolt क्यो नही है?

कलकत्ता के हावड़ा ब्रिज मे एक भी Pillar या Nut-Bolt क्यो नही है?

जब भी भारत में इंजीनियरिंग के कारनामों की बात आती है तो उसमें हावड़ा ब्रिज का नाम न आए। ऐसा नहीं हो सकता और अगर कोई फिल्म में कलकत्ता का सीन दिखाना हो तो ऐसा हो ही नहीं सकता, जिसमें हावड़ा ब्रिज का शॉट या सीन न हो, चाहे वह पीकू या गुण्डे यानी अगर कहें तो ये हावड़ा ब्रिज ही है जिसके लिए कोलकाता अपनी मिठाईयों से भी ज्यादा फेमस है। लेकिन ये तो हम सब शायद जानते हैं कि हावड़ा ब्रिज कितना फेमस है लेकिन हम में से बहुत कम लोग जानते हैं कि इस ब्रिज के बनने की कहानी क्या है

क्या आप कभी कोलकाता गए हैं ? यदि हां तो कोलकाता की सबसे खूबसूरत चीज़ क्या लगी ? मुझे तो जब भी कोलकाता का जिक्र होता है एक ही चीज़ याद आती है और वो है कोलकाता का हावड़ा ब्रिज। वास्तव में अपनी अद्भुत खूबसूरती की वजह से कोलकाता की सबसे ख़ास जगहों में से एक ये ब्रिज न सिर्फ अपनी खूबसूरती को प्रस्तुत करता है बल्कि लोगों के बीच मुख्य आकर्षण का केंद्र भी है जिसे देखने विदेशों तक से पर्यटक आते हैं।

हावड़ा ब्रिज एक कैंटिलीवर पुल है जो पश्चिम बंगाल में हुगली नदी पर फैला है। यह एक ब्रैकट ब्रिज एक कैंटिलीवर का उपयोग करके बनाया गया है, संरचनाएं जो क्षैतिज रूप से अंतरिक्ष में प्रोजेक्ट करती हैं, केवल एक छोर पर समर्थित हैं। दूर से देखने में इस ब्रिज की संरचना किसी गणितीय संरचना को प्रस्तुत करती है। सामान्यतः कोई भी ब्रिज कई खम्बों पर टिका होता है लेकिन यह एक ऐसा पुल है जो केवल चार खम्बों पर टिका हुआ है जिसमें दो नदी के इस तरफ और दो नदी के उस तरफ दिखाई देते हैं। पुल में नट और बोल्ट नहीं हैं और इसे पूरी संरचना को चीर कर बनाया गया था।

इस पुल के निर्माण के लिए तत्कालीन बंगाल सरकार के द्वारा एक एक्ट पारित किया गया,जिसे हावड़ा ब्रिज एक्ट 1926 के नाम से जाना जाता है। बहुत कम लोगों को ये जानकारी है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानियों द्वारा इस ब्रिज को नष्ट करने की कोशिश की गई थी, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिल पाई। 14 जून 1965 को महान राष्ट्रीय कवि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के नाम पर पुल का नाम बदलकर रवींद्र सेतु रखा गया। हालांकि, यह अभी भी हावड़ा ब्रिज के रूप में अधिक लोकप्रिय है।

इस पुल से प्रतिदिन लगभग 100000 वाहन एवं लगभग 150000 पैदल यात्री हुगली नदी को पार करते है, जो पश्चिम बंगाल के दो प्रमुख शहरों कोलकाता एवं हावड़ा को जोड़ता है। पुल का उपयोग करने वाला पहला वाहन पहले ट्राम था। इसके निर्माण के समय, यह तीसरा सबसे लंबा कैंटिलीवर पुल था। अब, यह दुनिया में अपने प्रकार का आठवां सबसे लंबा पुल है।

नोट – प्रत्येक फोटो प्रतीकात्मक है (फोटो स्रोत: गूगल)

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. timepass अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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