कैसे बनती है कोयले से बिजली ,समझिये पूरी जानकारी …

कैसे बनती है कोयले से बिजली ,समझिये पूरी जानकारी …

देश के थर्मल प्लांट्स इन दिनों कोयले की कमी से जूझ रहे हैं. मीडिया में ऐसी खबरें आ रही हैं कि कई प्लांट्स में कुछ ही दिन का कोयले का स्टॉक बचा हुआ है. ऐसे में आशंका है कि कोयले की कमी के चलते देश में बिजली संकट गहरा सकता है. केंद्र और राज्य सरकारें हालात को नियंत्रित करने में जुटी हैं. कोयले के संकट को लेकर हंगामा तो खूब बरपा हुआ है लेकिन ये बात बहुत कम जानते हैं कि कोयले से बिजली कैसे बनती है और देश में पर्याप्त भंडार (Coal Mines) होने के बावजूद कोयले का संकट कैसे पैदा हो गया है? तो आइए समझते हैं-

कैसे बनती है कोयले से बिजली?
कोयले से बिजली बनाने के लिए देश में जगह-जगह थर्मल प्लांट लगे हैं. बता दें कि सबसे पहले कोयले की खदानों से कोयला निकाला जाता है. इसके बाद ये कोयला रेलगाड़ियों की मदद से थर्मल प्लांट पहुंचता है. इन थर्मल प्लांट में कोल फील्ड होता है, जहां रेलगाड़ियों से निकालकर कोयला इकट्ठा किया जाता है.

इसके बाद एक मशीन की मदद से कोल फील्ड से यह कोयला क्रशर मशीन तक पहुंचाया जाता है. इस क्रशर मशीन में कोयला को तोड़कर बारी कर दिया जाता है. इस क्रशर मशीन से निकलने के बाद कोयला दूसरी क्रशर मशीन में पहुंचता है, जहां यह कोयला चूर्ण की तरह बारीक पीसा जाता है.

इसके बाद इस कोयले के चूर्ण को भट्टी नुमा बॉयलर में डाला जाता है, जहां से इस चूर्ण में से हल्के कण आग में जलकर राख के रूप में ऊपर उठते हैं और भारी कण नीचे गिर जाते हैं. नीचे गिरे कणों को सीमेंट फैक्ट्रियों को दे दिया जाता है, जिससे सीमेंट बनता है. वहीं ऊपर उठे कोयले के धुआं भट्टी के ऊपर बने पानी के छोटे-छोटे पाइप से टकराता है. जिससे पानी से भरे ये छोटे-छोटे पाइप गर्म हो जाते हैं और इससे भाप बनती है.

एक पाइप के जरिए ये भाप बड़े-बड़े टरबाइन तक जाती है. जिसके बाद भाप की शक्ति से ये टरबाइन तेजी से घूमते हैं और इनके घूमने से बिजली बनती है.

कोयले की कमी की क्या है वजह?
हमारे देश में कोयले के पर्याप्त भंडार हैं लेकिन हमारे देश में पाए जाने वाले कोयले की क्वालिटी उतनी बेहतर नहीं है, जितनी इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका में पाए जाने वाले कोयले की होती है. इसके चलते हमारे देश में पाए जाने वाले कोयले से प्रदूषण भी काफी होता है. ऐसे में हम विदेशों से कोयले का आयात भी करते हैं. चूंकि इन दिनों कोयले की कीमत काफी बढ़ी हुई है. इसलिए कोयले का आयात भी प्रभावित हुआ है.

इसके अलावा कोरोना महामारी के चलते कोयले का उत्पादन भी कम हुआ था. इससे भी सप्लाई प्रभावित हुई. वहीं कोरोना महामारी के बाद अर्थव्यवस्था में तेजी आई है, जिसके चलते बिजली की खपत बढ़ी है. बिजली की खपत बढ़ने के कारण भी कोयले का संकट पैदा हुआ है. कुछ कोयला खदानों में बारिश के चलते पानी भी भर गया था. इसके चलते कोयला गीला होने के कारण उसका ठीक तरह से पीसने पर चूर्ण नहीं बन पा रहा है, इससे भी कोयले से बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है.

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नोट – प्रत्येक फोटो प्रतीकात्मक है (फोटो स्रोत: गूगल)

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