समुन्द्र में से किस तरह निकला जाता है पेट्रोल और डीजल..

समुन्द्र में से किस तरह निकला जाता है पेट्रोल और डीजल..

पेट्रोल और डीजल आज के समय मे इंसान की एक अहम जरूरत बन चुका है। इनकी आवश्यकता हर रोज पड़ती है और यह बात भी सच है की जैसे जैसे इनका इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है वैसे वैसे इनकी कीमत भी लगातार बढ़ती ही जा रही है और भारत मे तो इनकी कीमत अब आसमान छूने लगी है। भारत मे पेट्रोल की कीमत 100 रुपये के आसपास पहुच गयी है और आने वाले समय मे इनके दाम और भी ज्यादा होंगे।

पेट्रोल और डीजल कैसे बनता है?
भारत मे Petrol का उत्पादन नही किया जाता है और इस वजह से इसे दूसरे देशों से इम्पोर्ट किया जाता है यानी कि मंगवाया जाता है और इस वजह से इस पर ढुलाई का चार्ज लगता है और आम जनता तक पहुचते पहुचते इस पर कई तरह के टैक्स लग जाते है जिस कारण ये पेट्रोल हमे इतना महंगा मिलता है। हमारे देश मे तो पेट्रोल की कीमत बहुत ज्यादा है लेकिन दुनिया के कई देशों में पेट्रोल पानी से भी सस्ता है। जी हां जिन देशों में पेट्रोल का उत्पादन किया जाता है वहा पर पेट्रोल की कीमत बहुत कम है जैसे कि अरब देशों में।

बता दे कि जिस स्पीड से हम पेट्रोल और डीजल जैसी चीजों का इस्तेमाल कर रहे है अगर हम इसी तरह इन्हें Consume करते रहे तो ये आने वाले करीब 40 सालों मे खत्म हो जाएंगे, जमीन के नीचे Petrol डीजल कुछ भी नही बचेगा, क्योंकि ये सब चीज़े धरती पर लिमिटेड है। जैसे-जैसे पेट्रोल और डीजल खत्म होता जाएगा वैसे वैसे इनके दाम लगातार बढ़ते जाएंगे।

आज के समय मे हम सब पेट्रोल और डीजल पर ही निर्भर है। हमारे रोजमर्रा की जितनी भी चीज़े है जैसी की सब्जी-भाजी, फल और तेल बगैरह इन सब को बड़े बड़े ट्रक में भरकर एक शहर से दूसरे शहर लाया और ले जाया जाता है और जिसके लिए जरूरत पड़ती है ईंधन  यानी कि पेट्रोल और डीजल की, जो धरती पर बिल्कुल सीमित है और बिना ईंधन के कोई भी वाहन नही चल सकता है। जब ईंधन के दाम बढ़ते है तो इसके साथ साथ सभी चीजों के दाम बढ़ जाते है, महगाई भी बढ़ जाती है। लेकिन कुछ किया भी नही जा सकता है क्योंकि अभी तो हम पूरी तरह से इन्ही संसाधन Resources पर निर्भर है।

लेकिन ये पेट्रोल और डीजल बनता कैसे है, पेट्रोलियम ज़मीन के अन्दर से निकाला जाता है, तो सवाल ये आता है की यह तेल जमीन के अन्दर कैसे बना? तो आपको बता दे कि हजारों लाखों साल पहले पेड़,पौधे और जीव-जंतु जमीन के अन्दर पृथ्वी पर आए विनाश के कारण दब गए और बहुत ज्यादा दबाव और गर्मी के कारण यही मृत पौधे और जानवर पेट्रोलियम में बदल गए। इसके बाद इंसान ने जमीन और समुन्द्र के अन्दर पेट्रोलियम के ऐसे भंडार का पता लगाया और समुन्द्र की चट्टानों से इस काले तरल पदार्थ को निकालना शुरू कर दिया।

बता दे कि ऐसा बिल्कुल नही है कि इन्हें सीधे धरती को खोद कर निकाल लिया जाता है। ये अपने प्योर फोम यानी होते है यानी कि जमीन से शुध्द पेट्रोल और डीजल नही निकलता है। बल्कि जमीन से पेट्रोलियम निकलता है, पेट्रोल हमे काले और गाढ़े तरल के रूप में मिलता है जिसे पेट्रोलियम कहते है। बता दे की पेट्रोलियम एक लेटिन भाषा का शब्द है जिसका मतलब होता है चट्टानों से निकलने वाला तेल। पेट्रोलियम के कुएं होते है इनमे से कच्चा तेल यानी कि क्रूड ऑयल निकाला जाता है।

इस तेल में पेट्रोल, नैपथ, कैरोसिन, डीज़ल, मोम, पिच जैसी चीजें होती हैं। इसके बाद इस कच्चे तेल यानी कि क्रूड ऑयल को साफ करने के लिए कारखानों में लाया जाता है जिन्हें पेट्रोल रिफ़ाइनरीज़  कहा जाता हैं। इसके बाद इस कच्चे तेल को बड़े बड़े बेलनाकार बर्तनों में डाला जाता है और गर्म किया जाता है। फिर अलग अलग तापमान पर कच्चे तेल में मौजूद चीजें अलग-अलग पाइपों द्धारा निकाल ली जाती हैं, तो इस तरह से पेट्रोलियम का एक हिस्सा हमे पेट्रोल के रूप में मिलता है। इस कच्चे तेल को अलग अलग तापमान उबला जाता है और वो vaporized होता है जिससे अलग अलग तापमान पर अलग अलग चीज़े मिलती है। जैसे इसे 260℃ पर उबालने पर डीजल मिलता है, 180℃ पर केरोसिन यानी कि मिट्टी का तेल मिलता है, 110℃ पर पेट्रोल मिलता है। इसके अलावा कच्चे तेल से और भी कई चीज़े मिलती है जैसे मोम, गिलिसरिन, पैराफिन वैक्स ओर डामर।

पेट्रोल को निकालने के बाद इसे ट्रांसपोर्ट किया जाता है, साथ ही इसकी टेस्टिंग भी होती है इसमें ये देखा जाता है कि कितने ओकटाइन का पेट्रोल है और फिर इसे पेट्रोल पंप पर भेजा जाता है।

बता दे कि कच्चा तेल समुद्र और जमीन दोनों पर ही मिलता है। लेकिन ऐसा नही है कि दुनिया मे हर जगह कच्चा तेल हो। दुनिया मे कुछ ही जगह है जहां से कच्चा तेल मिलता है। अमेरिका और रूस में भी कच्चे तेल का उत्पादन होता है लेकिन दुनिया मे सबसे ज्यादा कच्चे तेल का उत्पादन अरब देशों में ही होता है।

पेट्रोल और डीजल का एक बार इस्तेमाल होने के बाद इन्हें दोवारा रीसायकल नही किया जा सकता है यानी कि ये सिर्फ एक बार इस्तेमाल होने वाली चीज है और पेट्रोल और डीजल धरती पर अनलिमिटेड नही है यानी ये धरती पर एक न एक दिन खत्म होना ही है और इसी वजह से अब इलेक्ट्रिक गाड़ियां का निर्माण हो रहा है जिससे की आने वाले टाइम में जब पेट्रोल और डीजल जैसी चीज़े खत्म हो जाएंगी तब भी हमारा काम चलता रहे और हम सिर्फ पेट्रोल और डीजल पर निर्भर न रहे।

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नोट – प्रत्येक फोटो प्रतीकात्मक है (फोटो स्रोत: गूगल)

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. timepass अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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