वायरलेस चार्जिंग से कैसे चार्ज होता है मोबाइल,जानिए ये जानकारी..

वायरलेस चार्जिंग से कैसे चार्ज होता है मोबाइल,जानिए ये जानकारी..

स्मार्टफोन्स में इन दिनों वायरलेस चार्जिंग का ट्रेंड खूब बढ़ा है। पहले ज्यादातर स्मार्टफोन यूज करने वाले लोग जहां भी जाते थे, चार्जिंग प्वाइंट की तलाश करने लगते थे। लेकिन वायरलेस चार्जिंग के आ जाने से स्मार्टफोन यूजर्स को चार्जिंग में काफी सहूलियत मिली है। अब ज्यादातर यूजर प्रीमियम स्मार्टफोन्स के साथ वायरलेस चार्जिंग को अपना रहे हैं। इसके लिए उन्हें अब चार्जिंग प्वाइंट के लिए परेशान नहीं होना पड़ रहा है और वो इस नई तकनीकी से ही फोन चार्ज कर ले रहे हैं। लेकिन कई यूजर्स ऐसे भी हैं, जिन्हें लगता है कि डिवाइस पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। अगर आपके भी मन में इस तरह के सवाल हैं, तो ऐसे में सबसे पहले आपको ये जानने की जरूरत है कि ये वायरलेस चार्जिंग की तकनीक कैसे काम करती है और क्या ये तकनीक डिवाइस पर बुरा असर डालती है? आइए इस रिपोर्ट में जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब…

कैसे काम करती है वायरलेस चार्जिंग?
जानकारों के मुताबिक वायरलेस चार्जिंग से मोबाइल को चार्ज करने के लिए खास तरह की डिवाइस का प्रयोग होता है, जिसे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन कहते हैं। ये डिवाइस हवा में इलेक्ट्रिक एनर्जी को रिलीज करता है, इससे फोन चार्ज होता है।

हवा में कैसे चार्ज हो जाता है फोन?
इलेक्ट्रो मैग्नेटिक इंडक्शन ऑन होने के बाद अपने चारों ओर एक मैग्नेटिक फील्ड तैयार करता है। वहीं वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करने वाले फोन में कॉपर की कॉइल होती है, जो कि मैग्नेटिक फील्ड से कनेक्ट होती है। इस मैग्नेटिक फील्ड से इलेक्ट्रिक एनर्जी तैयार होती है और फोन की बैटरी चार्ज होने लगती है।

वायरलेस चार्जिंग से फोन की बैटरी पर क्या असर पड़ता है?
दरअसल, सामान्य चार्जर के मुकाबले वायरलेस चार्जिंग के दौरान फोन गर्म होता है। कुछ फोन ऐसे होते हैं जो इस गर्मी को सहन नहीं कर पाते। अगर यूजर इस बात का ध्यान नहीं रखता है तो फोन को नुकसान पहुंच सकता है।

वायरलेस चार्जिंग कितनी बेहतर है?
वायरलेस चार्जिंग के फायदे बहुत हैं। इसके लिए आपको चार्जिंग प्वाइंट की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि जानकारों का मानना है कि ये वायर चार्जर के मुकाबले कम असरदार है, क्योंकि इसे काम करने के लिए अधिक पावर की जरूरत होती है

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नोट – प्रत्येक फोटो प्रतीकात्मक है (फोटो स्रोत: गूगल)

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. timepass अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]


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